Real Number Class 9th |Class 9th Math chapter1 | Part 1
The Pi Pathमार्च 30, 2026
Unit-I: वास्तविक संख्याएँ | Real Numbers
UNIT - I
वास्तविक संख्याएँ
Real Numbers
पिछली कक्षाओं में हमने विभिन्न प्रकार की संख्याओं के बारे में पढ़ा है। आइये, इनके बारे में हम और अधिक जानकारी प्राप्त करें।
वास्तविक संख्याएँ : वैसी संख्या जिसका वर्ग कभी भी ऋणात्मक नहीं होता है, उसे वास्तविक संख्या कहते हैं।
जैसे —2² = 4, (−3)² = 9, (2/3)² = 4/9, (−3/4)² = 9/16, (√−5)² = −5
अत: यहाँ पर 2, −3, 2/3, −3/4 इत्यादि वास्तविक संख्याएँ हैं लेकिन √−5 वास्तविक संख्या नहीं है।
वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण (Classification of Real Numbers)
संख्याओं के प्रकार (Types of Numbers)
प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers) : गिनती की सभी संख्याओं को प्राकृत संख्याएँ कहते हैं। प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N निम्नलिखित है। N = {1, 2, 3, 4, 5...}
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers) : शून्य को मिलाकर सभी प्राकृत संख्याओं के परिवार को पूर्ण संख्याएँ कहते हैं। पूर्ण संख्याओं का समुच्चय W निम्नलिखित है। W = {0, 1, 2, 3, 4, 5, 7}
नोट :– सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ हैं, लेकिन सभी पूर्ण संख्याएँ प्राकृत संख्याएँ नहीं हैं। अत: n ⊆ W और n प्राकृत संख्या नहीं है।
पूर्णांक (Integers) : सभी प्राकृत संख्याओं, शून्य (0) एवं प्राकृत संख्याओं के ऋणात्मक को मिलाने से संख्याओं का जो परिवार बनता है उसे पूर्णांक संख्याएँ कहते हैं। पूर्णांक संख्याओं के समुच्चय को Z द्वारा सूचित किया जाता है।
जैसे : ..., −4, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3... सभी पूर्णांक संख्याएँ हैं।
अर्थात् Z = {−4, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3}
सम संख्याएँ (Even Numbers) : वैसी संख्याएँ जो 2m रूप में हों, जहाँ m एक प्राकृत संख्या है, सम संख्याएँ कहलाती हैं।
जैसे : 2, 4, 6, 8, 10... इत्यादि।
विषम संख्याएँ (Odd Numbers) : वे संख्याएँ जो (2m − 1) रूप में हों, जहाँ m एक प्राकृत संख्या है, विषम संख्याएँ कहलाती हैं।
जैसे : 1, 3, 5, 7, 9... इत्यादि।
रूढ़ संख्याएँ (Prime Numbers) : वैसी संख्याएँ जो केवल 1 या स्वयं अपने से विभाज्य हों, वे रूढ़ संख्याएँ कहलाती हैं।
जैसे : 2, 3, 5, 7, 11, 13... इत्यादि।
यौगिक संख्याएँ (Composite Numbers) : वैसी संख्याएँ जो 1 या स्वयं के अलावे किसी अन्य संख्या से भी विभाज्य हों, उन्हें यौगिक संख्याएँ कहते हैं।
उदाहरणार्थ : 4, 6, 8, 9, 10, 12, 14, 15 इत्यादि।
पूर्णांकों का संख्या रेखा पर निरूपण (Representation of Integers on Number Line)
XY एक ऐसी सरल रेखा खींचा गया जिसे दोनों ओर अनन्त तक बढ़ाया जा सकता है। इस सरल रेखा पर कोई बिन्दु 0 लेते हैं तथा मान लें कि यह बिन्दु 0 (zero) पूर्णांक को व्यक्त करता है। अब कोई निश्चित दूरी (इकाई) लेकर, इस रेखा पर शून्य के दोनों ओर भिन्न-भिन्न बिन्दु निरूपित करते हैं।
O बिन्दु के दायीं ओर 1 इकाई, 2 इकाई, 3 इकाई, 4 इकाई इत्यादि दूरी पर स्थित बिन्दु क्रमश: 1, 2, 3 एवं 4 इत्यादि को निरूपित करते हैं।
इसी प्रकार O बिन्दु के बायीं ओर 1 इकाई, 2 इकाई, 3 इकाई, 4 इकाई इत्यादि दूरी पर स्थित बिन्दु क्रमश: −1, −2, −3 एवं −4 इत्यादि को निरूपित करते हैं।
चूँकि सरल रेखा XY को दोनों ओर अनन्त तक बढ़ाया जा सकता है, इसलिए सरल रेखा XY पर समान दूरी पर भिन्न-भिन्न बिन्दुओं द्वारा प्रत्येक पूर्णांक को निरूपित किया जा सकता है।
इस प्रकार XY सरल रेखा पर O के दायीं ओर 525 इकाई दूरी पर स्थित बिन्दु पूर्णांक 525 को तथा O के बायीं ओर 450 इकाई दूरी पर स्थित बिन्दु पूर्णांक −450 को निरूपित करता है।
इसी सरल रेखा को संख्या रेखा कहते हैं।
परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)
परिमेय संख्याएँ : वे संख्याएँ जो p/q के रूप में हों, जहाँ p एवं q पूर्णांक संख्याएँ हैं एवं q ≠ 0 है, को परिमेय संख्याएँ कहते हैं।
चूँकि 0 को 0/1 के रूप में लिखा जा सकता है। अत: 0 भी एक परिमेय संख्या है।
प्रत्येक प्राकृत संख्या भी परिमेय संख्या है, क्योंकि इसे हम इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं —
1 = 1/1, 2 = 2/1, 5 = 5/1 इत्यादि।
इसी तरह से पूर्णांकों को भी व्यक्त किया जा सकता है।
−1 = −1/1, −2 = −2/1, −3 = −3/1 इत्यादि।
अत: पूर्णांक संख्याएँ भी परिमेय संख्याएँ हैं।
परिमेय संख्या का मानक रूप (Standard Form of a Rational Number)
किसी परिमेय संख्या p/q को हम तभी उसके मानक रूप में कहा जाता है, यदि p तथा q पूर्णांक संख्याएँ हों, तथा उनके बीच 1 के अलावे कोई सार्वनिष्ठ गुणनखंड न हो तथा q = 0 हो।
इस प्रकार परिमेय संख्याएँ 8/16, 7/14, 6/12, 5/10, 4/8 इत्यादि का मानक रूप 1/2 है।
परिमेय संख्याओं का संख्या रेखा पर निरूपण (Representation of Rational Numbers on Number Line)
एक मान रेखा XY खींचें, तथा इस पर एक बिन्दु O हो। मान लिया कि बिन्दु गुन (0) को निरूपित करता है। अब O बिन्दु के दायीं ओर इकाई दूरी पर एक बिन्दु A इस प्रकार है कि OA = 1 इकाई। मान कि OA का मध्य बिन्दु B है।
अत: OB = 1/2 इकाई होगा। अब O के दायीं ओर OB की दूरी के बराबर भिन्न-भिन्न दूरियों OB, 2OB, 3OB, 4OB इत्यादि अंकित करें जो परिमेय संख्याएँ 1/2, 1, 3/2, 2 इत्यादि को निरूपित करेंगी।
इसी प्रकार XY पर O बिन्दु के बायीं ओर OB के बराबर भिन्न-भिन्न दूरियाँ OB, 2OB, 3OB, 4OB इत्यादि अंकित करें जो कि परिमेय संख्याएँ −1/2, −1, −3/2, −2 इत्यादि को निरूपित करेंगी।
चूँकि परिमेय संख्याओं का संख्या रेखा पर निरूपण अद्वितीय नहीं होता है इसलिए नीचे दिये गए परिमेय संख्याओं को आसानी से संख्या रेखा पर व्यक्त किया जा सकता है।
जैसे : 2/5 = 4/10 = 6/15 = 8/20 = ... = 20/50 ...
अत: ये सभी परिमेय संख्याएँ समतुल्य परिमेय संख्याएँ हैं।
उदाहरण 1. 3/5 के समतुल्य पाँच परिमेय संख्याएँ लिखें।
अत: 3/5 के समतुल्य पाँच परिमेय संख्याएँ इस प्रकार हैं:
6/10, 9/15, 12/20, 15/25, 18/30
Note : इस तरह किसी परिमेय संख्या के समतुल्य अनन्त परिमेय संख्याएँ ज्ञात की जा सकती हैं।
उदाहरण 2 : (Example 2)
क्या निम्नलिखित कथन सत्य हैं? अपने उत्तर के लिए तर्क दें।
(i) प्रत्येक पूर्ण संख्या, प्राकृत संख्या है।
(ii) सभी पूर्णांक, परिमेय संख्या हैं।
(iii) प्रत्येक परिमेय संख्या पूर्णांक है।
हल :
(i) गलत, क्योंकि 0 एक पूर्ण संख्या है लेकिन प्राकृत संख्या नहीं है।
(ii) सत्य, क्योंकि प्रत्येक पूर्णांक को p/1 के रूप में लिखा जा सकता है। अत: प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या है।
(iii) गलत, क्योंकि परिमेय संख्या 4/7 पूर्णांक नहीं है।
उदाहरण 3 : 2⅖ एवं −3⅕ को संख्या रेखा पर निरूपित करें
हल :
XY एक सरल रेखा खींचें।
O बिन्दु के दायीं ओर OP = 1 इकाई, OQ = 2 इकाई एवं OR = 3 इकाई लिया।
QR को पाँच बराबर भागों में बाँटा गया। QA, 1 इकाई के 2/5 माप को निरूपित करेगा।
इस प्रकार A बिन्दु XY संख्या रेखा पर 2⅖ को निरूपित करेगा।
इसी प्रकार O बिन्दु के बायीं ओर OS = 1 इकाई, OT = 2 इकाई OU = 3 इकाई रखा तथा OV = 4 इकाई लिया गया।
UV को पाँच बराबर भागों में बाँटा। BU, 1 इकाई के 1/3 माप को निरूपित करेगा।
इस प्रकार B बिन्दु XY संख्या रेखा पर −3⅕ को निरूपित करेगा।
दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना (To find rational numbers between two rational numbers)
दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्या ज्ञात करने की अनेक विधियाँ हैं। इन विधियों में प्रमुख विधि इस प्रकार है—
विधि 1.
मान कि p एवं q दो परिमेय संख्याएँ हैं इन्हें जोड़ें एवं 2 से भाग दें। इस प्रकार (p + q)/2, p एवं q के बीच की परिमेय संख्या होगी। इसी विधि को आगे बढ़ाते हुए दो परिमेय संख्याओं के बीच अनेक परिमेय संख्याएँ ज्ञात की जा सकती हैं।
उदाहरणार्थ — 2 एवं 3 के बीच तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना —
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